शनिवार, 29 सितंबर 2012

राष्ट्रीय पुरस्कार चयन में देरी के आसार,

दलाल अब भी सक्रीय

मूमल नेटवर्क, जयपुर। शिल्प के क्षेत्र में दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाले शिल्पों के चयन में हो रही देरी के चलते इस साल भी यह पुरस्कार समय पर वितरित होने के आसार कम होते जा रहे है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश स्तर पर चयनित होने वाली कृतियां चुनी जा चुकी हैं। द्वितीय चरण में मुख्यालय स्तर पर दिल्ली में 7 सितम्बर 2012 को प्रदेशों से चुन कर आई प्रविष्ठियों में श्रेष्ठ कृतियों का चयन होना था। समाचार लिखे जाने तक मुख्यालय स्तर पर इस पर कोई कार्यवाई नहीं हुई। इस देरी के चलते केन्द्रीय चयन समिति द्वारा श्रेष्ठतम शिल्पों के चयन के लिए होने वाली कार्रवाई में भी देरी के आसार हो गए हैं।
अंतिम चरण में केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए 20 व राष्ट्रीय प्रमाण पत्रों के लिए भी 20 श्रेष्ठ शिल्पकृतियों का चयन किया जाएगा। अगर कार्य की गति बढ़ाकर सब कार्य समय से हों तो यह समिति अपना कार्य 21 नवम्बर 2012 को पूरा करेगी।
हालांकि ऐसा कभी नहीं हुआ है, फिर भी अगर तय कार्यक्रम के अनुसार चयनित शिल्पकृतियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और वर्ष 2011 के लिए शिल्पगुरू सम्मान इसी वर्ष दिसम्बर के महीने में हस्तशिल्प सप्ताह के दौरान वितरित किए जाएंगे।
समितियों की संरचना
मुख्यालय स्तरीय समिति के सदस्य 
1. डीसी के अध्यक्ष
2. एडीसी संयोजक
3. एडीसी (हथकरघा)
4. 3 हस्तशिल्प से गैर सरकारी विषय विशेषज्ञ 
केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति के सदस्य
1. सचिव के अध्यक्ष (कपड़ा)
2. विकास आयुक्त (हस्तशिल्प)
3. विकास आयुक्त (हथकरघा)
4. अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक
5. अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक, एचएचईसी सदस्य
6. कार्यकारी निदेशक, सदस्य / निफ्ट प्रवर्तन निदेशालय
7.  4 अन्य विषय विशेषज्ञ
दलाल अब भी सक्रीय
हालांकि प्रदेश स्तर पर प्राप्त प्रविष्ठियों के अनुसार राष्ट्रीय पुरस्कारों की दौड़ में शामिल शिल्पों का चयन किया जा चुका है। अब जो कुछ होना है इन चुनिंदा आयटमों में से ही होना है, फिर भी प्रदेश में खासकर जयपुर में ऐसे दलाल सक्रीय हैं जो शिल्पियों को यह बोल कर झांसा दे रहे हैं कि वे अब भी कृतियां सीधे दिल्ली भिजवा सकते हैं। ये वहीं दलाल हैं जो प्रदेश स्तर के चयन से पूर्व भी जयपुर के कुछ शिल्पियों को दिल्ली ले जाकर अधिकारियों से मिलवाते और उनकी सेवा-पूजा कराते रहे हैं। इन्हीं दलालों ने प्रदेश स्तर पर चुने जा चुके शिल्पियों को दिल्ली में मुख्यालय और केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति में आगे बढ़ाने के लिए लेन-देन की बातें चला रखी हैं। यह बात भी फैलाई जा रही है कि प्रदेश स्तर चुनी जा चुकी कुछ कृतियों को अधिकारी स्तर पर हटाया जा सकता है तो कुछ को नए सिरे से चुना भी जा सकता है।
उधर डीसीएच सूत्रों के अनुसार इस बार पुरस्कारों के लिए होने वाले चयन में काफी पारदर्शिता बरती जा रही है। जयपुर और दिल्ली के कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए है कि वे दफ्तर के भीतर और बाहर सक्रीय ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें और मुख्यालय को उनकी सूचना भी दें।
प्रदेश स्तर पर चयन के समय दिल्ली से आए खुल्लर नामक व्यक्ति की गतिविधियों की चर्चा जयपुर से दिल्ली तक अब भी हो रही है। जयपुर के स्थानीय दलालों के जरिए शराब, कबाब और नगद पैसों की भेंट लेने वाले  उन व्यक्ति विशेष और दिल्ली की एक महिला अधिकारी की गतिविधियां भी उच्चाधिकारियों की नजर में हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर चुनी गई कृतियों के बारे में मुख्यालय स्तर पर विचार के समय उन शिल्पियों की सूचि भी सम्मुख रखी जागी जो यहां दलालों और दिल्ली से आए व्यक्ति के सम्पर्क में रहे।
ऐसे आया बदलाव
इस वर्ष प्रदेश स्तर पर गठित चयन समिति के लिए चुने गए पारखी चयनकर्ताओं में सभी निष्पक्ष और गैरतमंद जानकार चुन लिए गए। मूमल को मिली जानकारी के अनुसार चयनकर्ताओं के नाम जाहिर होने के बाद से ही उन्हें सिफारिशी फोन आने शुरू हो गए थे। उसके बाद तोहफों और मिठाई के डिब्बों का सिलसिला चला। चयनकर्ताओं के दरवाजों से रूखी विदाई की जानकारी दिल्ली तक पहुंची। उसके बाद वहां की एक महिला अधिकारी और वरिष्ठ कर्मचारी ने सिफारिशी शिल्पियों को निश्चिंत रहने को कहा और उसके बाद प्रदेश स्तर पर चयन के समय दिल्ली से खुल्लर नामक व्यक्ति का जयपुर आगमन हुआ।
खुल्लर ने यहां खल्लम-खुल्ला चांदी पर मीनाकारी वाले एक फ्लास्क को चुनने के लिए चयनकर्ताओं पर दबाव बनाया, लेकिन जयपुर के दबंग चयनकर्ताओं ने उसकी एक न सुनी।  कहते हैं बाद में खिसियाए हुए खुल्लर ने उद्योग भवन परिसर में उन शिल्पियों से सम्पर्क करना शुरू किया जिनके आयटम सिलेक्ट हो चुके थे। उसने सभी को यह कहा कि चयनकर्ताओं ने तो उनहें रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन उसने चयन करा दिया है। इस बात की पुष्ठि जयपुर के दलालों से भी कराई। इसके बदले में शिल्पियों से शराब की बोतल, पुखराज जैसे कुछ नगीनों की मांग की गई। उनके झांसे में आए कुछ शिल्पियों ने तो हाथों-हाथ बोतलें खरीद कर दीं।
इस बात से चयनकर्ता और अधिक चिढ़ गए और उन्होंने दिल्ली से आए व्यक्ति की दिल्ली कार्यालय में  शिकायत करने के लिए एक पत्र भी तैयार कराया..... जो अभी तक भेजा नहीं गया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मुख्यालय स्तरीय चयन के रवैये को देखकर उसे प्रेषित किया जाएगा।

रविवार, 16 सितंबर 2012

RUDA Craft fare washed by Rain


रुडा के क्राफ्ट बाजार मे भरा पानी निकलते लोग  
रूडा मेले पर बरसात ने पानी फेरा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। प्रदेश में सामान्य से अधिक हो रही बारिश का ध्यान रखे बगैर पूर्व निर्धारित तिथियों के अनुसार क्राफ्ट बाजार लगा दिए गए। नतीजा ये कि जहां बारिश का ध्यान रखते हुए व्यवस्थाएं की गई वहां नुक्सान नहीं हुआ, जबकि रूडा जैसे संस्थानों द्वारा आयाजित शिल्प मेले में देश के विभिन्न स्थानों से आए दस्तकारों को नुक्सान उठाना पड़ा।
शानिवार 15 सितम्बर 2012 को कुछ देर के लिए हुई बारिश ने ही जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के शिल्प ग्राम में पानी भर दिया। यहां रूडा की और से एक दिन पहले ही शुरू हुए क्राफ्ट बाजार में आए शिल्पियों को इससे काफी नुक्सान हुआ। वर्षा के कारण जहां बाजार में ग्राहक नहीं आए वहीं स्टालों में पानी भर जाने से उनके सामान भीग गए। स्टालों के सामने से पानी निकालने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

बिड़ला ऑडिटोरियम मे सिल्क कलेक्शन     
दूसरी ओर बिड़ला ऑडिटोरियम में देशभर से आए आर्टिजन ने सिल्क के साथ एक्सपेरिमेंट कर बनाया यूनिक कलेक्शन पेश किया गया। यहां बरसात के कारण ग्राहक कम नजर आए, लेकिन पानी के कारण आर्टिजन को शिल्पग्राम जैसा नुक्सान नहीं उठाना पड़ा। शनिवार 15 सितम्बर 2012 को ही बिड़ला ऑडिटोरियम में सिल्क उत्सव शुरू हुआ। इसमें असम, बंगाल और बिहार के सिल्क में कई नए कलेक्शन डिसप्ले किए गए हैं। वर्क, डिजाइंस और कलर्स पैटर्न के साथ आउटफिट्स को अधिक आकर्षक बनाया गया है। सिल्क में ये बदलाव यूथ के टेस्ट को देखते हुए किए गए हैं। ताकि फैशन और स्टाइल में सिल्क पीछे ना रहे, बदलाव में परंपरागत सिल्क की खूबसूरती को बरकरार रखा गया है।
पार्टी और शादियों में पहने जाने वाले आउटफिट्स को भी डिजाइनर साड़ी में तैयार किया गया है। जरी वर्क और असली सिल्वर वर्क जिसे अम्बॉज कहा जाता है। इसके रफ मेटेरियल को ज्यों का त्यों रखा जाता है, ताकि आधुनिकता के साथ परंपरागत का बेहतर तालमेल रहे। इसके हैवी वर्क और डिजाइनर के कारण इसकी कीमत 18,000 से 40,000 रुपए तक है।
सांगानेरी, बगरू और गुजरी प्रिंट अब सिल्क में नजर आए। सिल्क को अधिक कलरफुल बनाने के लिए इन प्रिंट्स का इस्तेमाल किया गया है। काथा, भागल और असम की मलबरी सिल्क पर विभिन्न प्रिंट्स का प्रयोग किया गया है। साथ ही आरी वर्क और थ्रेड वर्क किया गया है। इनकी कीमत 1400 से 6000 तक है।
सिल्क को कई रंगों और स्टाइल में ढालने के लिए वेस्टर्न स्टाइल का प्रयोग किया गया है। यह सिल्क पर नेट की साड़ी तैयार की गई। है इसे तैयार करने में 15 दिन लगते हैं, क्योंकि इसे आर्टिजन पूरी तरह से हाथ से तैयार करते हैं। इससे इसमें किसी तरह का डिफेक्ट नहीं आता। इसे सुपर नेट नाम दिया गया है। जरी का वर्क कर इसे डिजाइनर बनाया गया है। इसकी कीमत 8000 से शुरू होती है।
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