मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

बुधवार, 13 नवंबर 2013

काश! कला जगत में 'मैं' की जगह 'हम' हो


 मूमल संपादकीय
चहुमुखी सराहना तो कुछ आलोचना भी

जयपुर का पहला आर्ट समिट सम्पन्न हो गया। ...और जैसा कि अक्सर होता रहा है, इसके आयोजन के प्रति भी विरोधी स्वर मुखर हुए। समिट की समाप्ती से पहले ही जयपुर के कलाकारों की गुटबाजी के नतीजे सामने आने लगे। मुद्दा वही अहम् का रहा। इस प्रकार एक बेहतर पहल को सराहना के साथ-साथ आलोचना भी मिली।
 माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल
 कला जो कभी सत्यम शिवम सुन्दरम् और सुखाय का दूसरा नाम हुआ करती थी अब उसके पैमाने बदल गए हैं। कलाकारों क बीच की गुटबाजी, राजनीतिक दलों की खेमेबाजी का अहसास कराने लगी है। इसके चलते कला जगत का माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल। ऐसे में आपस में ही लड़ते-भिड़ते कलाकार क्योंकर आम आदमी को कला की ओर आकर्षित कर अपनी कला से उन्हें जोड़ पाएगें। यही कारण है कि कुछ कलाकार तो अब साफ ही कहने लगे हैं कि उनकी खास कला आम आदमी के लिए है ही नहीं।
इस गुटबाजी और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप को प्रतिस्पर्था का क्रत्रिम चोला नहीं पहनाया जा सकता। स्वस्थ्य प्रतियोगिता तो एक अलग ही शै होती है जो कला को और निखारने का काम करती है। प्रतिस्पर्धियों को  और बेहतर कृतियों का कर्ता बनने को प्रेरित करती है। उसके इरादों को और मजबूत बनाती हैं। आम आदमी से सहजता पूर्वक जोड़ती है। जबकि गुटबाजी कलाकार के संवेदशील मन में विकार और द्वन्द के जाल में उलझा देती है। इसका सीधा असर उसकी कृतियों में देखने को मिल जाता है। साधना से साध्य के बजाय साधन और भोतिकता की ओर बढ़ते कला के कदम इसी का परिणाम है।
मैं के कठघरे में कैद 
हम यह नहीं कह रहे कि निर्मित कलाकृतियां सुंदर नहीं, लेकिन स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के अभाव में वे कांतिहीन हैं, प्राणहीन भी कह सकते हैं। कला संसार सहजता, सरलता, सद्भाव और संवेदनाओं से सजता है। इसे मैं की जगह हम का भाव प्रभावी बना सकता है। यहां इस बात का अफसोस है कि कलाकार मैं के कठघरे में स्वयं को कैद करता जा रहा है।
 उधेड़ सकते हैं तो बुन भी सकते हैं।
यह सही है कि किसी भी आयोजन में बहुत कुछ अच्छा किए जाने के बाद भी कुछ कमियां रह जाती है। किसी आयोजन में ये कमियां कुछ होती हैं और किसी में बहुत कुछ छूट जाता है। इन कमियों को बेहतर सलाह, सहृदयता, सहनशीलता और साथ के बल पर दूर किया जा सकता है। जब जब एक खेमा अपने आयोजन में दूसरे खेमें की कला को स्थान नहीं दे पाता है तो दूसरे खेमें के आयोजन में पहले खेमे की कला को स्थान नहीं मिलने की विवशताएं उसी प्रकार की होती है जैसी पहले आयोजन के लिए थी। इसी प्रकार किसी फैस्टिवल या समिट के आयोजन में भी कई बाते अलग हो सकती हैं, ऐमें उनकी तुलना बेमानी हो जाती है। कुल मिलाकर हम चाएं तो कमियों की फटी चादर में अपनी मैं की टांग फंसा कर उसे और अधिक उधेड़ सकते हैं और चाहें तो हम के ताने-बाने से उसे बुन भी सकते हैं।

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

लोकरंग-2013, राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला

(19 से 29 अक्टूबर, 2013)
लोक कलाकारो और हस्त शिल्पियों के राष्ट्रीय उत्सव का शुभारंभ कल से
राज्यपाल श्रीमती माग्रेट आल्वा करेंगी उद्घाटन

Moomal Network, जयपुर। राज्यपाल, राजस्थान महामहिम श्रीमती माग्रेट आल्वा कल शनिवार 19 अक्टूबर, 2013 को सायं 6.30 बजे जवाहर कला केन्द्र, जयपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला-गांधी शिल्प बाजार एवं राष्ट्रीय लोकनृत्य समारोह लोकरंग-2013 का विधिवत् उद्घाटन कर शुभारंभ करेंगी।

यह जानकारी देते हुए श्रीमती राजेश यादव, महानिदेशक जवाहर कला केन्द्र ने बताया की शिल्पग्राम में लगे राष्ट्रीय हस्त शिल्प मेंले-गांधी शिल्प बाजार में देश के विभिन्न प्रदेशो के हस्तशिल्प कलाकार 150 से भी अधिक स्टॉल में अपनी हस्तशिल्प कला को प्रदर्शित कर रहे है।
विभिन्न प्रदेशो से आये इन शिल्पियों में कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पियों के साथ कुछ नये कलाकार भी सम्मिलित हो रहे है। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह मेला शिल्प कला के खरीददारो को भी प्रोत्साहित करता है। मेले में राजस्थान सहित 21 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के हस्तशिल्पियों की स्टॉल में वुड वर्किंग, एम्ब्रोडरी, टेक्सटाईल, लाख की चूडिय़ां, केन बेम्बू, हेण्डलूम, जूट, पेच वर्क, ब्लू पोटरी, टेराकोटा, पेपरमेशी, लेदर वर्क, जूट क्राफ्ट, लकड़ी के खिलौने, ड्राई फ्लावर, पेंटिग, बंधेज, कशीदाकरी आदि शिल्प कला के उत्कृष्ठ नमूने प्रदर्शित किये जा रहे है।
मेला प्रति दिवस मध्यांह 2.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहेगा। मेले के दौरान फूड जोन में अपने मन पसंद व अन्य जायकेदार व्यंजनों का दर्शक लुत्फ उठा सकेंगे।
त्यौहारों को और अधिक जीवंत बनाने के लिए लोक कलाकार अपनी संगीत और नृत्य की छठा प्रति दिवस शिल्पग्राम के डूंगरपुर हट के मंच पर
बिखेरेंगे। इसी क्रम में प्रथम दिवस 19 अक्टूबर को डूंगरपुर हट मंच पर छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार अपनी नृत्यों की प्रस्तुति देंगे, वहीं बहुरूपिया, कच्ची घोड़ी आदि के कलाकर भी अपनी कला से दर्शको को रू-ब-रू करवायेंगे। मेले मेे प्रवेश नि:शुल्क है।

राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह

11 दिवसीय इस 20 वें लोकरंग के दौरान केन्द्र के मध्यवर्ती सभागार में प्रतिदिवस देश के कोने-कोने से विभिन्न प्रदेशो, केन्द्र शासित प्रदेशो के नृत्य दल, गायक समूह और लोक नाट्य अपनी परंपरा अपने संगीत और अपने प्रदेश की सांस्कृतिक छटा से दर्शको को सराबोर करेंगे। इसमें प्रतिभागी 22 राज्य यथा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, हिमाचल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू कश्मीर, झारखण्ड, कर्नाटक, असम, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश एवं राजस्थान के लगभग 1200 कलाकार भाग लेंगे।

लोकनृत्य समारोह के प्रथम दिन मध्यवर्ती में 19 अक्टूबर 2013 शनिवार सायं 7.00 बजे महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम, मणिपुर, झारखण्ड, एवं राजस्थान के लगभग 150 कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति देंगे। इसी क्रम में महाराष्ट्र के कलाकार-लांवणी, गुजरात-सिद्धिगोमा,
छत्तीसगढ़-पंथी, ओडिशा-गोटीपुआ, असम-बिंहु, मणिपुर-मणिपुर रास, झारखण्ड-करसा, संथाल, मानभूम छाऊ, राजस्थान - चरी नृत्य की प्रस्तुति
देंगे।

विशेष सामग्री

उन्नीस वर्षो के सफल आयोजन का इतिहास लिए राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह 'लोकरंगÓ-2012 में अपनी शैशवास्था और तरूणाई से निकल अब पूर्ण वयस्क हो गया है। इस वर्ष भी देश के कोने - कोने से विभिन्न प्रदेशो, केन्द्र शासित प्रदेशो के नृत्य दल, गायक समूह और लोक नाट्य अपनी परम्परा, अपने संगीत और अपने प्रदेश की सांस्कृतिक छटा से सराबोर जवाहर कला केन्द्र में सम्मिलित होंगे।
भारतीय पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से प्रारम्भ होकर एकादशी अर्थात 19 से 29 अक्टूबर, 2013 तक चलने वाले इस समारोह में राजस्थान सहित देश के विभिन्न प्रान्तो के लोक एवं आदिवासी कलाकार अपने पारम्परिक वेश, अनूठे वाद्य यंत्रो और मद मस्त संगीत के साथ प्रति दिन दर्शको के समक्ष समृद्ध भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति देंगे। समारोह का समापन सब राज्यो की सम्मिलित प्रस्तुति के रूप में 'ग्रान्ड फिनालेÓ निश्चय ही सुधी दर्शको को जोड़े रखने में सफल होगा।
गत 'लोकरंगÓ समारोह में उमड़े जन समूह को दृष्टिगत रख मुक्ताकाशी सभागार के बाहर परिसर में स्क्रीन पर कार्यक्रमों के जीवंत प्रसारण की भी व्यवस्था की गई है।
तीन दिवसीय समारोह से प्रारम्भ होकर यह लोकरंग अब ग्यारह दिनों तक मनाया जाता है किन्तु हर दिन दर्शकों का सैलाब आनन्द की लहरो में डूब जाता है। अपने 20वें सोपान पर लोकरंग अपनी गरिमा पूर्ण परम्परा के अनुरूप अनेकता में एकता की हमारी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के साथ
आपको सादर समर्पित है। आइए हर्ष, उल्लास और आनन्द के इस पर्व में आप भी सम्मिलित हो सकतेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे हैं।

राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला
(दोपहर 2 से रात्रि 10 बजे तक)
केन्द्र परिसर के शिल्पग्राम में आयोजित यह बहुरंगी मेला देश की प्रति-निधि हस्तकलाओं की वृहद प्रदर्शनी प्रस्तुत करता है। ग्रामीण राजस्थान की झलक प्रस्तुत करते शिल्पग्राम में प्रदेश के ग्रामीण वास्तु पर आधारित छ: घर बने हुए है। बृज (भरतपुर) के घर में खपरेल की छाजन है तो हाडौती (पलायता) में केलू की; दक्षिणी राजस्थान के भील ऊंचे टीलो पर घर बनाते है, उसी परम्परा में बना है, डूंगरपुर का भील डूंगरपुर आवास; बाड़मेर के गोल झौपे निर्माण में सेवण घास की छप्पर और आक की लकड़ी लगी है; बीकानेर और सीकर के निवास भी अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध निर्माण सामग्री से बने है; बीच का बाजार (हॉट) जयपुर का है इन मकानों में बने मांडणे भी संबंधित क्षेत्रों से ही लिए गये है। यहां देखा जा सकता है समग्र राजस्थान।
भारतीय हस्तशिल्पियों और उनके हस्त कौशल का संगम 'लोकरंगÓ के अवसर पर शिल्पग्राम में देखने को मिलता है। सभी प्रदेशों के शिल्पी अपनी श्रेष्ठ कृतियों के साथ यहां आते है। इनमें राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी तो होते ही है, कुछ नए कलाकारों को भी अवसर दिया जाता है ताकि नई पीढ़ी भी तैयार हो। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय आर्थिक सहयोग से आयोजित यह मेला शिल्पकला के खरीददारों को भी प्रोत्साहित करता है। मेले में लगभग 150 स्टॉल में देश के विभिन्न देशों के हस्तशिल्प कलाकार अपनी हस्तकला को प्रदर्शित करेंगे।
जयपुर, जोधपुर का बंधेज, कच्छ की कशीदाकारी, मोलेला - पोकरण की मृदाकला, बस्तर का लोह शिल्प, बंगाल का चर्म शिल्प, दक्षिण भारत की वस्त्र बुनाई, लाख, नमदा, काष्ठ शिल्प, मोजड़ी कोल्हापुरी चप्पल, चिकनकारी, पैच वर्क, बांस-बैत का काम, यानि लोगों का मन मोह लेने वाले हर प्रकार के शिल्प प्रदर्शन और बिक्री के लिए यहां उपलब्ध रहेगा।
त्यौहारों को और अधिक जीवंत बनाने के लिए लोक कलाकार अपने संगीत और नृत्य की छटा प्रति दिवस शिल्पग्राम के डूंगरपुर हट के मंच पर बिखेरेंगे। वही नट, बहुरूपिया, अलगोजा, कठपुतली कलाकार भी अपनी कला से दर्शकों को रू-ब-रू करवायेंगे।

प्रतिभागी राज्य हैं
अरूणाचल प्रदेश, असम, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, गोवा, लक्षद्वीप, ओड़ीसा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, महाराष्ट्र, हरियाणा एवं राजस्थान।

राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह मध्यवर्ती में
सायं 7 बजे से
प्रायोजक हैं:
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला
दक्षिणी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, तेजावुर
तमिलनाडू, गोवा, महाराष्ट्र, बिहार
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड
मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, ओडिसा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश व राजस्थान।

बुधवार, 7 नवंबर 2012

शिल्प के राष्ट्रीय पुरस्कार 9 को

मूमल नेटवर्क , नई दिल्ली। हस्तशिल्प के क्षेत्र में श्रेष्ठ चुनिंदा कृतियों के शिल्पकारों को राष्ट्रीय सम्मान व पुरस्कार प्रदान करने के लिए 9 नवम्बर को राजधानी दिल्ली में समारोह होगा।
अगर सब निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हुआ तो विज्ञान भवन में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी शिल्पियों को एक समारोह में सम्मानित करेंगे।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के आधीन कार्यरत हस्तशिल्प विकास आयुक्त द्वारा प्रति वर्ष देशभर से चुने गए 20 श्रेष्ठ शिल्प कार्यों के लिए यह सम्मान दिए जाते हैं। इनमें 10 राष्ट्रीय पुरस्कार और 10 राष्ट्रीय मेंरिट प्रमाण की  श्रेणी में होते हैं। पिछले वर्ष 2010 के लिए यह पुरस्कार प्रदान नही  किए जा सके थे। इसलिए इस वर्ष 2011 के पुरस्कारों के साथ वह भी प्रदान किए जाएंगे।

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

हस्तशिल्प उत्पादों को उम्मीद से बेहतर रेस्पांस

                                 बिक्री का आंकड़ा 2500 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद
                                 नक्काशी एवं जड़ाऊ उत्पाद भी लिए जा रहे हाथों-हाथ

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के दाम बढऩे के बावजूद दीपावली व क्रिसमस के त्यौहारी सीजन में विदेशी और घरेलू बाजार में इन उत्पादों की मांग काफी बढ़ी है। उत्पादों को उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है। इसका कारण शिल्प की नई डिजाइंस व अनूठी निर्माण शैली तो है ही, महंगाई के बावजूद नियंत्रित कीमतें भी आकर्षण का कारण हैं। ऐसे में गत वर्ष की तुलना में इस साल बिक्री में 300 करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है। बिक्री का आंकड़ा 2500 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है। नक्काशी एवं जड़ाऊ हस्तशिल्प को उत्पादों को बाजार में हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
घरेलू मार्केट में भी पैठ
सस्ते व अनूठे उत्पादों की बदौलत विदेशी बाजार में दम भर रहा राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट कारोबार अब घरेलू मार्केट में भी पैठ बना रहा है। विदेशी बाजार में वुडन, टैक्सटाइल, नक्काशी, ब्लू पॉटरी, मार्बल, टेराकोटा, ग्लास वेयर व लाख के हैंडीक्राफ्ट उत्पाद के साथ घरेलू सजावट व फर्नीचर से जुड़े उत्पाद डिजाइनदार बेड, सोफा सेट, कुर्सियां, मेज, वाल पेंटिंग, मैटल व लकड़ी पर बारीक चित्रकारी कर बनाई गई घडिय़ां, फूलदान, पेड़ की छाल से बने कलात्मक फूल और चांदी की बारीक जड़ाऊ शो पीस की मांग अधिक है।
घरेलू बाजार में भी सजावट के लिहाज से इन उत्पादों की मांग काफी बढ़ी है। फेडरेशन ऑफ  राजस्थान एक्सपोर्टर्स के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा के अनुसार त्यौहारी सीजन में घरेलू सजावट से जुड़े हैंडीक्राफ्ट उत्पादों को उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है। नक्काशी एवं जड़ाऊ हैंडीक्राफ्ट उत्पादों को भी घरेलू बाजार में हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
दाम 20 फीसदी से अधिक बढ़ा
हैंडीक्राफ्ट उद्यमी व सीआईआई जयपुर शाखा के अध्यक्ष दिलीप बैद ने बताया की हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की मांग के पीछे इनकी डिजाइन व अनूठी निर्माण शैली तो है ही, कम कीमतें भी आकर्षण का कारण हैं। लेकिन पिछले कुछ अर्से से सरकारी रियायतों के बावजूद यह उद्योग बढ़े हुए लागत भार से त्रस्त है। हैंडीक्राफ्ट उत्पाद निर्माताओं व निर्यातकों ने इस सीजन में दाम 20 फीसदी से अधिक बढ़ा की बढ़ोतरी कर दी है। विदेशी बाजार से भी नए ऑर्डर बढ़ी कीमतों पर ही लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद गत वर्ष की तुलना में इस साल बिक्री में 300 करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।
बिक्री का आंकड़ा 2500 करोड़ के पार
निर्माताओं को बिक्री का आंकड़ा 2500 करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है। इसमें से करीब 1500-1600 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है। फैडरेशन ऑफ राजस्थान हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्ट (फॉरहेक्स) के अध्यक्ष जसवंत मील का कहना है कि  पिछले कुछ अरसे में कच्चे माल कीमतों में जबरदस्त उछाल रहा है। ऐसे में अंतिम विकल्प कीमतों में बढ़ोतरी है। कीमतें बढऩे से मांग पर आंशिक असर पड़ सकता है। लेकिन जिस हिसाब से इन उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ रही है, इसकी संभावना कम है।

गुरुवार, 1 नवंबर 2012

अब वयस्क हो गया जेकेके का 'लोकरंग'

मूमल नेटवर्क जयपुर। जयपुर के जवाहर कला केंद्र की ओर से आयोजित वार्षिक 'लोकरंग' का शुभारंभ राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने किया। पिछले अठारह वर्षो के आयोजन का इतिहास लिए राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह 'लोकरंग' अपनी शैशवास्था और तरूणाई से निकल
अब पूर्ण वयस्क हो गया है। इस वर्ष 2012 में भी देश के कोने-कोने से
विभिन्न प्रदेशो, केन्द्र शासित प्रदेशो के नृत्य दल, गायक समूह और
लोक नाट्य अपनी परम्परा, अपने संगीत और अपने प्रदेश की सांस्कृतिक
छटा से सराबोर लगभग 1200 कलाकार जवाहर कला केन्द्र में सम्मिलित
होंगे।
भारतीय पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से प्रारम्भ
होकर एकादशी अर्थात 30 अक्टूबर से 09 नवम्बर, 2012 तक चलने वाले
इस समारोह में राजस्थान सहित देश के विभिन्न प्रान्तो के लोक एवं
आदिवासी कलाकार अपने पारम्परिक वेश, अनूठे वाद्य यंत्रो और मद मस्त
संगीत के साथ प्रति दिन दर्शको के समक्ष समृद्ध भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति
देंगे। समारोह का समापन सब राज्यो की सम्मिलित प्रस्तुति के रूप में होगा।
गत 'लोकरंगÓ समारोह में उमड़े जन समूह को दृष्टिगत रख
मुक्ताकाशी सभागार के बाहर परिसर में स्क्रीन पर कार्यक्रमों के लाइव
प्रसारण की भी व्यवस्था की गई है।

तीन दिवसीय समारोह से प्रारम्भ होकर यह लोकरंग अब ग्यारह
दिनों तक मनाया जाता है
अपने 19वें सोपान पर लोकरंग अपनी गरिमा पूर्ण परम्परा के अनुरूप
अनेकता में एकता की हमारी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के साथ
दर्शको को समर्पित होगा।

राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला
केन्द्र परिसर के शिल्पग्राम में आयोजित यह बहुरंगी मेला देश की
प्रति-निधि हस्तकलाओं की वृहद प्रदर्शनी प्रस्तुत करता है।
भारतीय हस्तशिल्पियों और उनके हस्त कौशल का संगम
'लोकरंगÓ के अवसर पर शिल्पग्राम में देखने को मिलता है। सभी
प्रदेशों के शिल्पी अपनी श्रेष्ठ कृतियों के साथ यहां आते है।
इनमें राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी तो होते ही है,
कुछ नए कलाकारों को भी अवसर दिया जाता है ताकि नई पीढ़ी भी
तैयार हो। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के
सक्रिय आर्थिक सहयोग से आयोजित यह मेला शिल्पकला के खरीददारों को
भी प्रोत्साहित करता है। मेले में लगभग 150 स्टॉल में देश
के विभिन्न देशों के हस्तशिल्प कलाकार अपनी हस्तकला को प्रदर्शित
करेंगे।

क्या -क्या मिलेगा
जयपुर, जोधपुर का बंधेज, कच्छ की कशीदाकारी, मोलेला -
पोकरण की मृदाकला, बस्तर का लोह शिल्प, बंगाल का चर्म शिल्प, दक्षिण
भारत की वस्त्र बुनाई, लाख, नमदा, काष्ठ शिल्प, मोजड़ी कोल्हापुरी,
चप्पल, चिकनकारी, पैच वर्क, बांस-बैत का काम, यानि लोगों का मन
मोह लेने वाले हर प्रकार के शिल्प प्रदर्शन और बिक्री के लिए यहां
उपलब्ध रहेगा।

प्रतिभागी राज्य
प्रतिभागी राज्य हैं अरूणाचल प्रदेश, असम, आन्ध्र प्रदेश,
उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड,गोवा, लक्षद्वीप, ओड़ीसा, कर्नाटक, केरल,
गुजरात, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, मणिपुर,
महाराष्ट्र, हरियाणा एवं राजस्थान।

शनिवार, 29 सितंबर 2012

राष्ट्रीय पुरस्कार चयन में देरी के आसार,

दलाल अब भी सक्रीय

मूमल नेटवर्क, जयपुर। शिल्प के क्षेत्र में दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाले शिल्पों के चयन में हो रही देरी के चलते इस साल भी यह पुरस्कार समय पर वितरित होने के आसार कम होते जा रहे है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश स्तर पर चयनित होने वाली कृतियां चुनी जा चुकी हैं। द्वितीय चरण में मुख्यालय स्तर पर दिल्ली में 7 सितम्बर 2012 को प्रदेशों से चुन कर आई प्रविष्ठियों में श्रेष्ठ कृतियों का चयन होना था। समाचार लिखे जाने तक मुख्यालय स्तर पर इस पर कोई कार्यवाई नहीं हुई। इस देरी के चलते केन्द्रीय चयन समिति द्वारा श्रेष्ठतम शिल्पों के चयन के लिए होने वाली कार्रवाई में भी देरी के आसार हो गए हैं।
अंतिम चरण में केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए 20 व राष्ट्रीय प्रमाण पत्रों के लिए भी 20 श्रेष्ठ शिल्पकृतियों का चयन किया जाएगा। अगर कार्य की गति बढ़ाकर सब कार्य समय से हों तो यह समिति अपना कार्य 21 नवम्बर 2012 को पूरा करेगी।
हालांकि ऐसा कभी नहीं हुआ है, फिर भी अगर तय कार्यक्रम के अनुसार चयनित शिल्पकृतियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और वर्ष 2011 के लिए शिल्पगुरू सम्मान इसी वर्ष दिसम्बर के महीने में हस्तशिल्प सप्ताह के दौरान वितरित किए जाएंगे।
समितियों की संरचना
मुख्यालय स्तरीय समिति के सदस्य 
1. डीसी के अध्यक्ष
2. एडीसी संयोजक
3. एडीसी (हथकरघा)
4. 3 हस्तशिल्प से गैर सरकारी विषय विशेषज्ञ 
केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति के सदस्य
1. सचिव के अध्यक्ष (कपड़ा)
2. विकास आयुक्त (हस्तशिल्प)
3. विकास आयुक्त (हथकरघा)
4. अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक
5. अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक, एचएचईसी सदस्य
6. कार्यकारी निदेशक, सदस्य / निफ्ट प्रवर्तन निदेशालय
7.  4 अन्य विषय विशेषज्ञ
दलाल अब भी सक्रीय
हालांकि प्रदेश स्तर पर प्राप्त प्रविष्ठियों के अनुसार राष्ट्रीय पुरस्कारों की दौड़ में शामिल शिल्पों का चयन किया जा चुका है। अब जो कुछ होना है इन चुनिंदा आयटमों में से ही होना है, फिर भी प्रदेश में खासकर जयपुर में ऐसे दलाल सक्रीय हैं जो शिल्पियों को यह बोल कर झांसा दे रहे हैं कि वे अब भी कृतियां सीधे दिल्ली भिजवा सकते हैं। ये वहीं दलाल हैं जो प्रदेश स्तर के चयन से पूर्व भी जयपुर के कुछ शिल्पियों को दिल्ली ले जाकर अधिकारियों से मिलवाते और उनकी सेवा-पूजा कराते रहे हैं। इन्हीं दलालों ने प्रदेश स्तर पर चुने जा चुके शिल्पियों को दिल्ली में मुख्यालय और केन्द्रीय स्तरीय चयन समिति में आगे बढ़ाने के लिए लेन-देन की बातें चला रखी हैं। यह बात भी फैलाई जा रही है कि प्रदेश स्तर चुनी जा चुकी कुछ कृतियों को अधिकारी स्तर पर हटाया जा सकता है तो कुछ को नए सिरे से चुना भी जा सकता है।
उधर डीसीएच सूत्रों के अनुसार इस बार पुरस्कारों के लिए होने वाले चयन में काफी पारदर्शिता बरती जा रही है। जयपुर और दिल्ली के कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए है कि वे दफ्तर के भीतर और बाहर सक्रीय ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें और मुख्यालय को उनकी सूचना भी दें।
प्रदेश स्तर पर चयन के समय दिल्ली से आए खुल्लर नामक व्यक्ति की गतिविधियों की चर्चा जयपुर से दिल्ली तक अब भी हो रही है। जयपुर के स्थानीय दलालों के जरिए शराब, कबाब और नगद पैसों की भेंट लेने वाले  उन व्यक्ति विशेष और दिल्ली की एक महिला अधिकारी की गतिविधियां भी उच्चाधिकारियों की नजर में हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर चुनी गई कृतियों के बारे में मुख्यालय स्तर पर विचार के समय उन शिल्पियों की सूचि भी सम्मुख रखी जागी जो यहां दलालों और दिल्ली से आए व्यक्ति के सम्पर्क में रहे।
ऐसे आया बदलाव
इस वर्ष प्रदेश स्तर पर गठित चयन समिति के लिए चुने गए पारखी चयनकर्ताओं में सभी निष्पक्ष और गैरतमंद जानकार चुन लिए गए। मूमल को मिली जानकारी के अनुसार चयनकर्ताओं के नाम जाहिर होने के बाद से ही उन्हें सिफारिशी फोन आने शुरू हो गए थे। उसके बाद तोहफों और मिठाई के डिब्बों का सिलसिला चला। चयनकर्ताओं के दरवाजों से रूखी विदाई की जानकारी दिल्ली तक पहुंची। उसके बाद वहां की एक महिला अधिकारी और वरिष्ठ कर्मचारी ने सिफारिशी शिल्पियों को निश्चिंत रहने को कहा और उसके बाद प्रदेश स्तर पर चयन के समय दिल्ली से खुल्लर नामक व्यक्ति का जयपुर आगमन हुआ।
खुल्लर ने यहां खल्लम-खुल्ला चांदी पर मीनाकारी वाले एक फ्लास्क को चुनने के लिए चयनकर्ताओं पर दबाव बनाया, लेकिन जयपुर के दबंग चयनकर्ताओं ने उसकी एक न सुनी।  कहते हैं बाद में खिसियाए हुए खुल्लर ने उद्योग भवन परिसर में उन शिल्पियों से सम्पर्क करना शुरू किया जिनके आयटम सिलेक्ट हो चुके थे। उसने सभी को यह कहा कि चयनकर्ताओं ने तो उनहें रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन उसने चयन करा दिया है। इस बात की पुष्ठि जयपुर के दलालों से भी कराई। इसके बदले में शिल्पियों से शराब की बोतल, पुखराज जैसे कुछ नगीनों की मांग की गई। उनके झांसे में आए कुछ शिल्पियों ने तो हाथों-हाथ बोतलें खरीद कर दीं।
इस बात से चयनकर्ता और अधिक चिढ़ गए और उन्होंने दिल्ली से आए व्यक्ति की दिल्ली कार्यालय में  शिकायत करने के लिए एक पत्र भी तैयार कराया..... जो अभी तक भेजा नहीं गया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मुख्यालय स्तरीय चयन के रवैये को देखकर उसे प्रेषित किया जाएगा।